आत्मा की निर्माण

भूल-गलती बैठी है दिल के तख्त पर
छुपा बैठा है-
मन की गहराइयों मे एक ओरांग-उटांग!
जब यह प्रकट होता है-
लिल जाता है हमारे अंत:करण को।

हर इंसान के अंदर एक ऐसा हिस्सा छुपा होता है जो सही सोच पर हावी होकर गलत रास्ते पर ले जाता है।”

मुक्तिबोध जी का औरांग-उटांग(वनमानुष)
हमारे भीतर छिपा हुआ वह आदमी हिस्सा है  जो अनगढ़ है और यही अनगढ़ प्रवृत्ति कभी-कभी इंसान पर हावी हो जाती है।

और जब यह हावी होता है तो हमारा शुद्ध मन हमारा अंतरण अन्य हमारे भीतर की जो अच्छाइयां है वह बुराइयों में बदल जाती है।

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