ट्राय का युद्ध

युद्ध सबसे पहले इंसानियत को मारता है, और आखिर में जीतने वाले को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ती है…”

कहानी बहुत पुरानी है, लेकिन बात आज भी नई लगती है।एक शहर था—ट्रॉय। उस पर दस साल तक युद्ध चला, लेकिन दुश्मन उसे जीत नहीं पाए। तब उन्होंने एक चाल चली।

वे एक बहुत बड़ा लकड़ी का घोड़ा बनाकर शहर के बाहर छोड़ गए और ऐसा दिखाया जैसे हार मानकर चले गए हों। सोच बड़ी चालाक थी—उन्हें पता था कि लोग इसे जीत की निशानी, भगवान को चढ़ावा या दुश्मन की छोड़ी हुई ट्रॉफी समझकर खुद ही शहर के अंदर ले जाएंगे। हुआ भी यही।

शहर वालों ने सोचा—“दुश्मन हार गया”, और खुशी-खुशी उस घोड़े को अंदर ले आए।लेकिन उन्हें क्या पता था कि उस घोड़े के पेट में सैनिक छिपे बैठे हैं।रात हुई। शहर सो गया। तभी घोड़े के अंदर छिपे सैनिक बाहर निकले और किले के दरवाज़े खोल दिए। बाकी सेना भी लौट आई।

देखते-देखते शहर में आग लग गई। चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने भागने लगे।उसी शहर में एक लड़की थी—कैसेंड्रा, राजा की बेटी। डर के मारे वह भागकर देवी के मंदिर में पहुँच गई। उसने मूर्ति पकड़ ली और सोचा—“यह भगवान का घर है, यहाँ कोई हाथ नहीं लगाएगा।”पुराने समय में मंदिर जैसी जगहों को बहुत पवित्र माना जाता था। वहाँ किसी को चोट पहुँचाना बड़ा पाप समझा जाता था।लेकिन युद्ध में आदमी कभी-कभी आदमी रहना भूल जाता है।

एक सैनिक मंदिर में घुसा। उसने कैसेंड्रा को जबरन वहाँ से खींच लिया। लड़की बचने की कोशिश करती रही, लेकिन ताकत के सामने उसकी आवाज छोटी पड़ गई।

कहानी कहती है कि इस अन्याय से देवी भी नाराज़ हुईं। जब जीतकर लौट रहे सैनिक घर जा रहे थे, रास्ते में तूफान आए, जहाज़ डूबे, कई लोग मारे गए। जैसे दुनिया यही कह रही हो—“जीत अगर इंसानियत हारकर मिले, तो वह जीत भी सजा बन जाती है।”

इसलिए शायद कहा जाता है—युद्ध सबसे पहले इंसानियत को मारता है, और आखिर में विजेता को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

इस दर्दनाक घटना ने सिर्फ कहानियों में जगह नहीं बनाई, बल्कि कला को भी झकझोर दिया। इसी कथा से प्रभावित होकर चित्रकार Solomon Joseph Solomon ने 1886 में एक प्रसिद्ध पेंटिंग बनाई— Ajax and Cassandra ।

इस चित्र में वह पल दिखाया गया है, जब डरी हुई कैसेंड्रा मंदिर में देवी की मूर्ति को पकड़े बचने की कोशिश कर रही है और सैनिक उसे बलपूर्वक खींच रहा है। यह सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि युद्ध में टूटती इंसानियत और ताकत के अहंकार की तस्वीर बन जाती है।

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